आंसुओं का व्यापार-हिन्दी शायरी

 दीपक भारतदीप की जागरण-पत्रिका हमदर्दी जताने की कला हमें कभी नहीं आई किसी का दर्द देखकर मन रोया मन भर आंसु पर आंखें दरिया न बन पाई। शायद लोग दिमाग से सोचते हैं इसलिये हमदर्दी के शब्द जल्दी ढूंढ लेते दिल तक नहीं पहुंचता दूसरे का दर्द कर लेते हैं दिखावे में कमाई। नहीं करना सीखा... [पूरी पोस्ट]
writer दीपक भारतदीप

bharathasyahindi articledeepak bharatdeep

views
11
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[13 Jan 2010 11:21 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix