जज़्बात एक शय है-.हिन्दी शायरी
इंसान के जज्ब़ात शर्त से
और समाज के सट्टे के भाव से
समझे जाते हैं।
नये जमाने में
जज़्बात एक शय है
जो खेल में होता बाल
व्यापार में तौल का माल
नासमझी बन गयी है
जज़्बात का सबूत
जो नहीं फंसते जाल में
वह समझदार शैतान समझे जाते...
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दीपक भारतदीप
bharatinternetmast rammastram
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[18 Jan 2010 11:17 AM]



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