जज़्बात एक शय है-.हिन्दी शायरी

 दीपक भारतदीप की जागरण-पत्रिका इंसान के जज्ब़ात शर्त से और समाज के सट्टे के भाव से समझे जाते हैं। नये जमाने में जज़्बात एक शय है जो खेल में होता बाल व्यापार में तौल का माल नासमझी बन गयी है जज़्बात का सबूत जो नहीं फंसते जाल में वह समझदार शैतान समझे जाते... [पूरी पोस्ट]
writer दीपक भारतदीप

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[18 Jan 2010 11:17 AM]

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