मेरी प्रिय पुस्तक में से----

अमिताभ जब भी कभी खालीपन का अहसास हुआ, मुझे अपनी रुचिकर किताबों ने सम्भाला। जब भी कभी मन भारी होता है मैने हमेशा किताबों की शरण ली है। किताबें मुझे ज्यादा प्रियकर इसलिये भी लगती है कि उनमे स्वार्थ नहीं होता, उनमें छल नहीं होता, कपट नहीं होता, वे जैसी भी होती हैं... [पूरी पोस्ट]
writer अमिताभ श्रीवास्तव
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[18 Jan 2010 12:19 PM]

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