संस्थाएं नारायण- परायण बनें 7

मैत्री बाबा कहता है कि व्यक्ति पर उसका विश्वास है, संगठन पर नहीं। कारण व्यक्ति चैतन्यमय है, संगठन नहीं। संस्थाओं की मर्यादा होती है। व्यक्ति में जो प्रेरक शक्ति होती है, वह संस्था में नहीं होती। हम कभी-कभी कहते है। कि संस्थाओं को `पावर हाऊस´ जैसा होना चाहिए।... [पूरी पोस्ट]
writer अतुल
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[18 Jan 2010 12:38 PM]

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