कामरेड बसु केसरिया सलाम
हालाँकि यह उपयुक्त मौका नहीं है कि किसी दिवंगत व्यक्ति की आलोचना की जाए परन्तु जब देखा जाता है कि सारी पार्टियाँ, पूँजीवादी अखबार और तमाम ब्लॉगर बुद्धिजीवी तक एक स्वर में कह रहे हैं कि ‘‘साम्यवाद का स्तंभ ढह गया’’ तब मजबूर होकर इस मामले में अपनी राय...
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[18 Jan 2010 12:10 PM]



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