है दुनिया उसीकी,ज़माना उसीका... ओ पी नय्यर और रफ़ी का दर्द में दूबा हुआ एक कालजयी गीत
आज लगभग एक महिना होने आया, आपसे मुखातिब नहीं हो पाया. पिताजी की तबियत के कारण, काम में थोडा पिछड गया था. मूड भी नहीं बन पा रहा था. गोया कोई बडा़ उपन्यास लिखना था,जो मूड बना रहा था.इन दिनों, रफ़ी साहब का जन्म दिन चला गया २४ दिसंबर को. मैं संयोग से एक दिन...
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दिलीप कवठेकर
मोहम्मद रफ़ी
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[18 Jan 2010 11:52 AM]



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