यदि ऐसा ही है तो लीजीये अब चर्चा ही चर्चा

bihari babu kahin कहते हैं न कि जो होता है उसमें कोई न कोई अच्छाई छुपी होती है , पिछले दिनों चिट्ठों की चर्चा और चर्चाकारों के संदर्भ को लेकर जो बातें हुई उन्हें अब मैं दोहराना नहीं चाहता , मगर शायद अधिक भावुक होने के कारण और शायद इस वजह से कि प्रश्न विवेक भाई जो अनजाने... [पूरी पोस्ट]
writer अजय कुमार झा
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[18 Jan 2010 11:33 AM]

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