अपना भारत इक झंडे के नीचे आये तो कैसे
बहुत दिनों बाद एक गज़ल आपकी नज़र कर रहा हूं। गुरूदेव श्री पंकज सुबीर जी ने संवारकर इसे कहने लायक बनाया है। पढ़िये और बताइये कैसी लगी ?खून-पसीना खेतों में तो जनता रोज बहाती हैलेकिन किसके हल के नीचे बोलो सीता आती हैषडयंत्रों का खेल रचाता घात लगाकर झूठ...
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रविकांत पाण्डेय
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[18 Jan 2010 11:30 AM]



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