जहाँ नारी अपने अलग-अलग अंगों का घंटों और मिनटों के हिसाब से अलग-अलग सौदा कर रही है ---(मिथिलेश दुबे)

Dubey समाज में वेश्या की मौजूदगी एक ऐसा चिरन्तन सवाल है जिससे हर समाज, हर युग में अपने-अपने ढंग से जूझता रहा है। वेश्या को कभी लोगों ने सभ्यता की जरूरत बताया, कभी कलंक बताया, कभी परिवार की किलेबंदी का बाई-प्रोडक्ट कहा और सभी सभ्य-सफेदपोश दुनिया का गटर जो... [पूरी पोस्ट]
writer Mithilesh dubey

लेख

views
100
upvote
6
downvote
0
rating
6
comments
0
[18 Jan 2010 09:29 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix