हँसी के तले शिकन जो मिले
" हँसी के तले शिकन जो मिले "मैं हँसती तो हूँ पर कहूँ मैं किसेइस हँसी के तले शिकन जो मिलेकहूँ किस तरह दर्द के सिलसिलेदिखाऊँ किसे दर्द है जो मिलेन अरमानों की हसरत है मुझेन दीवानगी न उल्फत ही मिलेहौसला है मिला उस सफ़र के लिएमैं करूँ बंदगी पर सिफर ही मिले-...
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Kusum Thakur
कविता
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[18 Jan 2010 09:23 AM]



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