बोलो..तपस्वी बनोगे

मेरा कोना वो किसी का शत्रु नहीं है...सबका दोस्त है...धीमे धीमे बोलता है... उसने अपने जीवन के कोणों को मिटा दिया है...वो अब गोल है...सपाट चिकना गोल...उसपर बाहरी वातावरण का असर नहीं होता...क्या बात है...अगर किसी को दुनिया ज्यादा बुरी लगने लगी हो...तो उनके लिए सलाह... [पूरी पोस्ट]
writer archana rajhans
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[18 Jan 2010 08:41 AM]

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