बस की लय को पकड़ते हुए

उपस्थित ये बस दो रेगिस्तानी जिला मुख्यालयों को जोडती है जो दिन में शहर और रात में गाँव हो जाते है.सुबह ये शहर का सपना लिए जगते हैं और रात को सन्नाटा लिए सो जातें हैं.इनके बीच सदियों का मौन हैं, सिर्फ कहीं कहीं जीवन तो कहीं इतिहास मुखर हैं. बस की खिड़की से शहर... [पूरी पोस्ट]
writer sanjay vyas
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[18 Jan 2010 08:22 AM]

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