रूपाजीवाएँ सदियों से हैं किंतु वे कभी मुखर नहीं रहीं!
लंदन के लेगटम संस्थान और आब्जर्वर रिसर्च फाउण्डेशन ने कौनसे भारत की प्रशंसा की है? क्या उस भारत की जिसमें पाश्चात्य संस्कृति में आकण्ठ डूबा हुआ धनी समाज रहता है और परिवारों ने मुक्त यौनाचरण व्यवस्था को स्वीकार कर लिया है? या उस भारत की जहाँ आज भी...
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Mohanlal Gupta
samaj
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[18 Jan 2010 05:34 AM]



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