इरादा
नये साल में, चुन लीं हैं नई मन्ज़िलें।नये पंख लगाये, उड़ चले पुराने परिन्दें ॥नये ज़माने मे नया इतिहास रचने वाले ।आसमान को छूने का दावा करने वाले ॥अब तक जो होता रहा, अब ना हो पायेगा।ज़ुल्म के आगे, कोई सर ना झुक पायेगा ॥संभल जाओ, ऐ ज़ुल्म के ठेकेदारों,हम आ गये...
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dipayan
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[18 Jan 2010 04:14 AM]



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