९१ कोजी होम

भंगार गुलज़ार साहब , जिद्द भी कमाल की करते हैं जैसा वह सोचते हैं वैसा ही होना चहिये ,गाने की लाइन अगर लिख दीउसको आप तोड़ मडोड़ नहीं सकते और कोशिश, भूल कर मत कीजयेगा ....काम छोड़ देगें पर लाईन नहीं बदलेंगे ,कई बार होता है ऐसा ,एकदो शायरी कीकिताबे लोग पढ़ के... [पूरी पोस्ट]
writer भंगार

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[18 Jan 2010 03:57 AM]

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