चलो..मिट्टी खराब नहीं हुई आदमी की ।

कवि कोकास                 मृत्यु जीवन का एक शाश्वत सत्य है और एक सजीव के लिये अनिवार्य लक्षण । मृत्यु के पश्चात देह का अंतिम संस्कार भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना  जीते जी देह का... [पूरी पोस्ट]
writer शरद कोकास

आत्मा .

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[17 Jan 2010 22:11 PM]

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