पहले चलना तो सीखो बहन की तरह......

मा पलायनम ! तुम की रंगीनियों में नहाई हुईकल्पना की परी रेशमी चीर मेंजादुई रूप-रेखा तुम्हारी की यहजान आई अजन्ता की तस्वीर में.तुम की जैसे अभी मुस्करा कर खिलानींद की झील में वासना का कमलतुम की जैसे सुरा को मिली जिन्दगी तुम की सांचे में जैसे ढली हो गजल । आँख जैसे रुबाई... [पूरी पोस्ट]
writer डॉ. मनोज मिश्र
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[17 Jan 2010 21:47 PM]

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