पनघट मैं जाऊं कैसे?

शिल्पकार के मुख से पनघट मैं जाऊं कैसे, छेड़े मोहे कान्हा पानी      नहीं    है,    जरुरी   है   लानाबहुत   हुआ  मुस्किल, घरों  से  निकलना पानी  भरी  गगरी को,सर पे रख के... [पूरी पोस्ट]
writer ललित शर्मा
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[17 Jan 2010 21:08 PM]

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