ये कैसी जिन्दगी है........
अपनी आवाज भी मुझ को, सुनाई नही देती। ये कैसी जिन्दगी है जिन्दगी, दिखाई नही देती। नशा है जाम का जिस मे बहक चल रहे है सब, होश मे मुझको यहाँ जिन्दगी दिखाई नही देती। हरिक पल मर रहा है जिन्दगी का सामने मेरे, पकड़ना दूर,मुझको संग भी, चलने नही देती। खुदा ने दी,...
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परमजीत बाली
परमजीत बाली
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[17 Jan 2010 20:09 PM]



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