पॉलिश जैसी स्याह क़िस्मत

अनामदास का चिट्ठा नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के चौदह नंबर प्लेटफार्म पर सैकड़ों जूतों को स्कैन करता बारह साल का एक लड़का मेरे सामने रुका, "पॉलिश, साहब?"मेरे चेहरे और जूतों की रंगत को अनुभवी आँखों से एक-एक बार देखने के बाद उसने सवाल पूछा था, उसका अंदाज़ा सही था. मेरे जूतों को... [पूरी पोस्ट]
writer अनामदास

अनामदास का ब्लाग

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[17 Jan 2010 17:09 PM]

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