मौत भी न व्यर्थ जाने दी उसी उस्ताद ने ........
जीते जी भीजिन्होंने अपना सर्वस्व लगा दिया था दाव परसाम्यवादी सादगी और सामाजिक समभाव परमौत भी न व्यर्थ जाने दी उसी उस्ताद नेधरती माँ का क़र्ज़ चुकता कर दिया औलाद नेदेह अपनी कर गये जो दानउन्हें मेरीहार्दिक आदरांजलिदिवंगतज्योति बाबू बसु कोविनम्र श्रद्धांजलि...
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श्रद्धांजलि काव्य
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[17 Jan 2010 13:07 PM]



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