लाखों समर्थकों के ज्योति बाबू... और लाखों विरोधियों के भी

विनय पत्रिका बचपन में जब हम कलकत्ता से गांव जाते, तो बाबा-दादा और चाचा के उम्र के लोग ज्योति बाबू के बारे में पूछते थे। आजकल कुछ लोग बंगाल की चर्चा चलने पर ममता बनर्जी के बारे में पूछते हैं। बिहार के सुदूर गांव में उन दिनों अखबार एक दिन बाद पहुंचता था। न जाने कितने... [पूरी पोस्ट]
writer विनय मिश्र
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[17 Jan 2010 05:52 AM]

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