अज़नबी शहर के अज़नबी रास्ते...
अज़नबी शहर के अज़नबी रास्ते मेरी तनहाई पर मुस्कुराते रहेमैं बहुत दूर तक बस यूं ही चलता रहातुम बहुत दूर तक याद आते रहेज़हर मिलता रहा और जाम हम पीते रहे रोज़ ही मरते रहे और रोज़ ही जीते रहेज़िन्दगी भी हमें आजमाती रहीएक दिन ऐसा हुआ कि मैं ज़रा सा थक गयाथक के सोचा...
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रामकृष्ण गौतम
मनकही
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[17 Jan 2010 12:19 PM]



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