गुडिय़ा का ब्याह

laghukahani दोपहर का वक्त था। रोज की तरह चिड़कली छोटी बहन पंखी के साथ मिलकर अपनी गुडिय़ा का ब्याह रचाने में मशगूल थी। पास ही बैठी नाथी देवी रस्सी बटने के साथ-साथ शादी के सभी आयोजनों में शरीक थीं। विदाई की बेला थी। दहेज का सामान रखा जा रहा था। अन्य सामानों के साथ जब... [पूरी पोस्ट]
writer shivraj gujar

रचना संसार

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[17 Jan 2010 09:29 AM]

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