अजनबी सा अहसास

थोड़ी सी ज़मीन, थोड़ा सा आसमान आज एकाएक फिर सीखा कि प्यार की प्रक्रिया कभी स्थिर नहीं होती या तो वह विकसित होती चलती है या निगति की और बढती है. हम सोचते हैं 'अलग हो गए', 'भूल गए', प्यार 'मर' गया, 'अब कुछ नहीं 'बचा', या की 'भूला दिया', इसलिए 'क्षमा' हो गयी. पर वास्तव में यह होता नहीं.... [पूरी पोस्ट]
writer Surbhi
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[17 Jan 2010 09:15 AM]

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