दिसम्बर की सर्दी में तेरा जाना, यार..उपेन… कुछ जँचा नहीं

बिज़ूका फ़िल्म क्लब दिसम्बर की सर्दी में तेरा जाना, यार..उपेन… कुछ जँचाये भिन्न-भिन्न बोलियाँ / ये लाठियाँ, ये गोलियाँयह उपेन्द्र मिश्र की कविता की पंक्तियाँ हैं। उपेन्द्र मिश्र मुझसे तक़रीबन चौदह-पन्द्रह बरस बड़ा था। लेकिन हमारी मित्रता में उम्र कभी आड़े नहीं आयी। हम जब भी... [पूरी पोस्ट]
writer बिज़ूका फ़िल्म क्लब

srdhanjali

views
18
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
2
[17 Jan 2010 06:41 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix