एक ज़मीन तीन शायर : ’ग़ालिब’ ’दाग़’ और ’अमीर’ मिनाई
एक ज़मीन तीन शायर : ’ग़ालिब’ ’दाग़’ और ’अमीर’ मिनाई -सरवर आलम राज़ ’सरवर’ हम सब मिर्ज़ा ’ग़ालिब’ की मशहूर ग़ज़ल " ये न थी हमारी क़िस्मत कि विसाल-ए-यार होता’ से बाख़ूबी वाक़िफ़ हैं.न सिर्फ़ इस को सैकड़ो बार पढ़ चुके है बल्कि कितने ही गुलू-कारों ने अपनी आवाज़ के जादू से...
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आनन्द पाठक
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[08 Jan 2010 10:52 AM]



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