मत करो ऐसा ...........

zakhm मैं कोई वस्तु नहीक्यूँ मेरी बोली लगाते होदुनिया की इस मंडी मेंक्यूँ खरीदी बेचीं जाती हूँकभी धर्म के ठेकेदारों नेमेरी बलि चढ़ाई हैकभी समाज के ठेकेदारों नेमेरी बोली लगायी हैमैं भी इक इंसान हूँमुझमें भी खुदा बसता हैउसी खुदा की नेमत हूँजिसकी करते तुम आशनाई... [पूरी पोस्ट]
writer वन्दना
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[17 Jan 2010 05:49 AM]

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