बात 'जीवन-कला' की.....
एक हफ्ते से ज्यादा हो गया, रूबरू हुए.......बातें कुलबुला रही हैं.....कुछ कहना चाह रहीं हैं..मुझसे-आपसे..!! सोच रहा था की क्या कहूँ...क्या छोड़ दूँ... लेकिन इस द्विविधा का इलाज तो सालों पहले कबीरदास जी कर गए.... "बलिहारी गुरु आपकी, गोविन्द दियो बताये" . तो...
[पूरी पोस्ट]
आओ बात करें .......!
19
0
0
0
1
[17 Jan 2010 05:08 AM]



Shuffle








