दो-दो दिन पे खफ़ा होना, तुम

सलाम करता चलूं कुछ अगर होना हो तोमेरे लिये मां होनातुमसारी दुनियां एक तरफ़मेरा सारा जहां होनातुमरिश्ते नाते सब है बातेंछोटी मोटी वफ़ा होनातुममुझमें रहके कभी कभीहल्के फ़ुल्के जुदा होनातुमधन-दौलत न चांदी सोनामेरे लिये हवा होनातुममंदिर मस्जिद मैं न जाऊंमेरे भीतर खुदा... [पूरी पोस्ट]
writer ritu raj
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[17 Jan 2010 01:28 AM]

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