झूठ के पांव

रचना रवीन्द्र झूठ के पांवझूठ के पांव निकलते देखा है सच पे सवार होते देखा है कान्हा की आड़ में, लीला का नाम ले, कदाचार देखा है पवनसुतों के सीने में,व्याभिचार देखा है मर्यादा पुरुशोत्तमों को करते, भ्रष्टाचार देखा हैअपनी आयु लीलने को, जानकी को लाचार देखा है दूर... [पूरी पोस्ट]
writer रचना दीक्षित

सच

views
13
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
16
[17 Jan 2010 01:24 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix