Sifar

 रिश्तों से क्या कहूँ ? बुत,..... बुत सी रहेगी होकर रस्म,रेशम के पत्तों पर छलकेंगे जब मेरे नज़्म।एक-एक एहसास बेकार ही बह जाएगा,रस्म रेशम सा होकर भी... आख़िर बुत ही रह जाएगा।... [पूरी पोस्ट]
writer Sifar
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[27 May 2009 00:11 AM]

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