कुछ भी नहीं

 रिश्तों से क्या कहूँ ? अक्स कोई एक भी यहाँ पूरी नहीं,पर हर उस एक के बिना ...पूरा कुछ भी तो नहीं। कुछ ऐसी अधूरेपन की आदत सी है,कि, जिंदगी को सम्पूर्णता का आभास भी नहीं। इल्म है सबको, पर अनजान बनने कि आदत सी है,शायद कभी हम जागेंगे और ...........................कुछ... [पूरी पोस्ट]
writer Sifar
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[27 May 2009 00:12 AM]

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