मेरी आशाएं... मेरी ज़ंग... मेरा जहाँ...

 रिश्तों से क्या कहूँ ? हाथों में चंद लम्हों की चाह,पर लम्हे मेरी मर्ज़ी के। सपनों की एक लम्बी कतार,पर हर सपने मेरी बेचैनी के।एक राह क्षितिज तक जाती हुई,और उस पे मेरी परछाई। एक बात अधूरी सी,पूरा होने को अब तक आतुर।एक साँस... एक मोड़ पे,एक नज़र गुमसुम सी,एक रात जो... अब तक। एक बात... [पूरी पोस्ट]
writer Sifar
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[05 Aug 2009 14:30 PM]

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