पहली मुलाकात

 रिश्तों से क्या कहूँ ? अपने हाथों में वक्त की कुछ कालिख ले कर,कोई सोया था।सन्नाटे में उसके सपनो की गूँज बड़ी थी।देखा तो कोने में, आज भी वो तनहा खड़ी थी।कुलबुलाहट, मन की कुछ बेरुखे शब्दों का आँचल लिए थी।मैं ने टोका, तो रंग बदल के समझदारी का परिचय दिया उसने।मैं ने नासमझ बन कर कबूल... [पूरी पोस्ट]
writer Sifar
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[08 Aug 2009 15:01 PM]

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