Ismat Zaidi "Shefa kajgaonvi
ग़ज़ल _____________________नगमा जो प्यार का था,मेरे दिल में रह गया दह्शत्गरी का शोर ही महफ़िल में रह गयाइक सिम्त खाई , दूसरी जानिब कुआँ अमीक़हिन्दोस्ताँ तो आज भी मुश्किल में रह गया है सच पे झूठ ,झूठ पे सच की कई परत मैं तो उलझ के बस हक़ो बातिल...
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इस्मत ज़ैदी
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[16 Jan 2010 23:28 PM]



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