Ismat Zaidi "Shefa kajgaonvi

Ismat Zaidi ग़ज़ल _____________________नगमा जो प्यार का था,मेरे दिल में रह गया दह्शत्गरी का शोर ही महफ़िल में रह गयाइक सिम्त खाई , दूसरी जानिब कुआँ अमीक़हिन्दोस्ताँ तो आज भी मुश्किल में रह गया है सच पे झूठ ,झूठ पे सच की कई परत मैं तो उलझ के बस हक़ो बातिल... [पूरी पोस्ट]
writer इस्मत ज़ैदी
views
14
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
8
[16 Jan 2010 23:28 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix