Second Opinion
इस बार प्रस्तुत हैं अनिल पुष्कर कवीन्द्र की कवितायें ... पुष्कर जे.एन.यू.से रिसर्च कर रहे हैं . ज्यूँ ही लिखा! देह जब मैंने रचा - 'प्रेम-युग' तुम नहीं बदली जब रचा - 'शांति पर्व' तुम नहीं बदली जब तक जिया - 'क्रान्ति-काल' तुम नहीं बदली जब कहा - सर्वत्र...
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[16 Jan 2010 13:07 PM]



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