ख्वाब चौखट पे मेरी...
दे पाया ना सबको जहान मुकम्मल,खुदा ये जहान बनाया क्यों है...एक पल जी लेने की आस में,हमने सिफ़र बस पाया क्यों है...दिल में तो सबके घनघोर अंधेरा,घर में दीया ये जलाया क्यों है...दिखता नही अब चेहरा इसमें,ऐसा आईना लगाया क्यों है...रिश्ता नींद से कबका...
[पूरी पोस्ट]
अम्बरीश अम्बुज
18
0
0
0
3
[16 Jan 2010 07:48 AM]



Shuffle








