नव बसंत

मन वृन्दावन नव बसंत कल्पना के पर झुलाता दूर से नव गीत गाता गुनगुनाता फिर धरा में मुस्कुराता पास आया नव बसंत मूक प्रतिमाएं मुखर हो गा रहीं संगीत चंचल कौन रोके उन्मद लहर सा जो लहरता लहर आया मधु बसंत हो गया है क्या ना जाने ? लग रहा जैसे अंजाने आज मेरा दर्द कोई मस्तियों... [पूरी पोस्ट]
writer Deepa Pant
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[16 Jan 2010 10:20 AM]

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