दिल की बातें
उन्होंने मोहब्बत को खेल, दिल को एक खिलौंना समझा ।ठोकर खाकर भी, एक बेवफ़ा को हमनें अपना समझा ॥ दिल को जाना था, गया, अब ज़ान पर बन आई है ।फिर भी उनके हर सितम को हमने अदा समझा ॥----------------------------------------------------अपने चहरे पर आप यूँ नक़ाब ना...
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dipayan
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[16 Jan 2010 07:35 AM]



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