विबग्योर बिखराए प्रेम का यह प्रिज्म
छंदबद्ध, लयबद्ध व तुकान्त कविताओं के लिए मेरे मन में बहुत आदर का भाव है किन्तु जबरदस्ती की तुकमिलावन और त्वरित तुकबन्दी को पढ़ने - गढ़ने के लिए मेरे पास न तो समय है और न जगह। आज यूँ ही फरमाइश पर कुछ लिख रहा था और जब उसका पहला ड्राफ़्ट घर में सुनाया तो हाय -...
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sidheshwer
कविता
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[16 Jan 2010 06:26 AM]



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