रंग डालूँ एक लैंडस्केप

parul chaand pukhraaj kaa..... कलेजे में धुआँ-धुआँ सर्दियों का अलावपलकों में चौथ का चाँद होजी में हो कोहरे से नहायी काची- काची धूपहवा में, उड़ती-बिखरती मार्च की मदमाती महीन गंध ..गले में हों सोहनी के उनींदे सुरतबीयत ज़रा-ज़रा गिलहरी सीमन में जलते-बुझते मोरपंख रहेंहोंठों पर व्याकुल हो... [पूरी पोस्ट]
writer पारूल

मेरे फ़ितूर

views
33
upvote
5
downvote
0
rating
5
comments
15
[16 Jan 2010 06:03 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix