स्नोवा का पत्र, उपन्यास अंश और सैन्नी का स्नेह

नदिया बहती जाए दोस्तो, मुझे हाल ही में यह मेल मिला है..पत्र इतना दिलचस्प और आत्मीय है कि पढकर मुझे लगा मैं इसे सार्वजनिक करुं..स्नोवा का अस्तित्व हो या ना हो..उनकी कहानियां तो हैं..वे बोलती हैं...साल भर बोलती रहीं..छपती रहीं..सराही जाती रहीं..मैं साहित्य पेज देखती हूं... [पूरी पोस्ट]
writer Geetashree

सैन्नी

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[16 Jan 2010 04:55 AM]

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