दलित कवि मलखान सिंह की कविता पुस्तक 'सुनो ब्राह्मण' से एक कविता
सुनो ब्राह्मण,हमारे पसीने से बू आती है, तुम्हें ।x x x xतुम, हमारे साथ आओचमड़ा पकाएंगे दोनों मिल-बैठकर ।x x x xशाम को थककर पसर जाओ धरती परसूँघो खुद कोबेटों को, बेटियों कोतभी जान पाओगे तुमजीवन की गंध कोबलवती होती है जोदेह की गंध से ।...
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अनिल कान्त :
कविता
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[16 Jan 2010 04:34 AM]



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