"अन्धा बाँटे रेवड़ियाँ"
***राजीव तनेजा***"क्या हुआ?….आते ही ना राम-राम..ना हैलो-हाय...बस..बैग पटका सीधा सोफे पे और तुरन्त जा गिरे पलंग पे...धम्म से...कम से कम हाथ मुँह तो धो लो"..... "अभी नहीं...थोड़ी देर में".. "चाय बनाऊँ?"... "नहीं!...मूड नहीं है".. ."क्या हुआ तुम्हारे मूड...
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राजीव तनेजा
rajivtaneja
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[15 Jan 2010 14:20 PM]



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