हिंदी काव्य साहित्य में शकुन-अपशकुन का अनुशीलन

sahityakash -डॉ. अशोक प्रियरंजनभारतीय समाज में प्रारंभिक काल से शकुन अपशकुन की बड़ी मान्यता रही है। व्यापक समाज शकुनापशकुन का विचार करके ही अपने कार्यों का निष्पादन करता है। डॉ. परमात्मा शरण वत्स ने अपनी पुुस्तक शकुन-अपशकुन में हिंदी साहित्य की विविध कृतियों में इस... [पूरी पोस्ट]
writer dr ashok kumar mishra

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[15 Jan 2010 14:00 PM]

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