संस्थाएं नारायण- परायण बनें 5
सर्वोदय संगठन के पीछे नहीं पड़ता। इसमें भी उसकी अपनी एक दृष्टि है। सर्वोदय का सेवक आवश्यक प्रतीत होने पर स्थानिक संगठन बना सकता है। वह संगठन विचारनिष्ठ ही होगा। उसमें प्रत्येक व्यक्ति का दूसरे व्यक्ति से पूर्ण परिचय रहेगा। दंभ के लिए अवसर ही नहीं रहेगा।...
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अतुल
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[15 Jan 2010 11:14 AM]



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