बड़ा ही टुच्चा ग्रहण था
ग्रहण ?ये ग्रहण था ?अगर था तो बड़ा ही टुच्चा ग्रहण थाजो यूँ लगा और यूँ उतर गयाकोई निशां नहीं, किधर गया लेकिनदिन भर बवाल मचा रखा थासारी दुनिया को नचा रखा थासमाचार वालो ने !ज्योतिष वालो ने !अरे !ग्रहण ग्रहण क्या चिल्लाते हो ?ग्रहण तो लगे ही हुए हैं हमारी...
[पूरी पोस्ट]
AlbelaKhatri.com
मुक्त काव्य
27
2
0
2
1
[15 Jan 2010 11:30 AM]



Shuffle








