बड़ा ही टुच्चा ग्रहण था

साहित्य-सहवास ग्रहण ?ये ग्रहण था ?अगर था तो बड़ा ही टुच्चा ग्रहण थाजो यूँ लगा और यूँ उतर गयाकोई निशां नहीं, किधर गया लेकिनदिन भर बवाल मचा रखा थासारी दुनिया को नचा रखा थासमाचार वालो ने !ज्योतिष वालो ने !अरे !ग्रहण ग्रहण क्या चिल्लाते हो ?ग्रहण तो लगे ही हुए हैं हमारी... [पूरी पोस्ट]
writer AlbelaKhatri.com

मुक्त काव्य

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[15 Jan 2010 11:30 AM]

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