मीठी-मीठी भू जहाँ
मीठी-मीठी भू मीठी-मीठी भू जहाँ , गंध सुहानी देय। सब सुख सुलभ होय वहाँ, कृपा-सिंधु सब देय।। कृपा-सिंधु सब देय, तो बढ़े वंश धन-धान। सभी देय सम्मान, कोर्ट-कचहरी में मान।। कह `वाणी´ कविराज, दु:ख-दर्द सब के भागे। जाय खरीदो प्लाट, भू जहाँ मीठी लागे।। शब्दार्थ :...
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[15 Jan 2010 09:12 AM]



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