सीले सपने
उगता सूर्य कल यूँ बोला,चल मैं थोडा ताप दे दूंले आ अपने चुनिन्दा सपने कुछ धूप मैं उन्हें दिखा दूँउल्लासित हो जो ढूंढाकोने में कहीं पड़े थे,कुछ सीले से वो सपने निशा की ओस से भरे थे.गत वो हो चुकी थी उनकीलगा श्रम बहुत उठाने मेंजब तक टाँगे बाहर आकरसूरज जा...
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shikha varshney
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[15 Jan 2010 09:11 AM]



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